राज्यसभा में 26 नेताओं की एंट्री: शरद पवार और सिंघवी समेत कई दिग्गज पहुंचे, हरियाणा-बिहार सीटों पर चुनाव बाकी

नई दिल्ली

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत 26 उम्मीदवार सोमवार (9 मार्च) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होगा। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है।

10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं।

भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (9 मार्च) को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की।

बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा।

हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी।

ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले।

राज्यों में चुनावी समीकरण और कड़ा मुकाबला

बिहार (5 सीटें)

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बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (RJD) ने व्यवसायी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है।

एनडीए के उम्मीदवार: केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं।

नीतीश कुमार का ऐतिहासिक कदम: नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा जाने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिससे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (20 वर्ष) के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

राजद का समीकरण: राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा (BSP) की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है।

बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है।

ओडिशा (4 सीटें)

ओडिशा में भी एक सीट के लिए मुकाबला तय है।

भाजपा उम्मीदवार: प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार।

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बीजद उम्मीदवार: संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता।

भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है।

हरियाणा (2 सीटें)

हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है।

मैदान में उम्मीदवार: भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं।

विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार

चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं।

महाराष्ट्र (7 सीटें): सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।

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पश्चिम बंगाल (5 सीटें): सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) के चार उम्मीदवार – बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते।

असम (3 सीटें): सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार- जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (UPPL) के प्रमोद बोरो- निर्विरोध निर्वाचित हुए।

तेलंगाना (2 सीटें): कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए।

तमिलनाडु (6 सीटें): सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़

द्रमुक (DMK) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए।

छत्तीसगढ़ (2 सीटें): भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं।

हिमाचल प्रदेश (1 सीट): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।

 

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